पलायन: बिहार का सबसे बड़ा निर्यात उसके नौजवान क्यों हैं
पलायन कोई सांस्कृतिक आदत नहीं, एक हिसाब है। जब तक घर पर मिलने वाली मज़दूरी और बाहर मिलने वाली मज़दूरी का अंतर इतना बड़ा है, ट्रेन भरती रहेगी।
हिसाब जो हर परिवार लगाता है
बिहार के एक गाँव में अकुशल दिहाड़ी और लुधियाना, सूरत या दिल्ली की दिहाड़ी के बीच का अंतर अक्सर दोगुने से ज़्यादा होता है — और वहाँ काम बारह महीने मिलता है, जबकि यहाँ खेती के मौसम के बाद महीनों ख़ाली रहते हैं। कोई भी परिवार इस अंतर को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता। इसलिए पलायन पर नैतिक भाषण बेकार हैं; बदलनी होगी वह संख्या जिस पर परिवार फ़ैसला करता है।
जो पैसा लौटता है, और जो कभी नहीं लौटता
प्रवासी मज़दूरों द्वारा भेजा गया पैसा बिहार के ग्रामीण घरों की एक बड़ी आर्थिक रीढ़ है — यह छत बनवाता है, बच्चों की फ़ीस भरता है, और आपात इलाज का ख़र्च उठाता है। लेकिन जो लौटकर नहीं आता वह है समय: बीस साल की उम्र से चालीस तक का कामकाजी जीवन किसी और राज्य के उत्पादन में जुड़ता है, और उसका कौशल, कर, तथा उससे बनने वाला छोटा उद्यम भी वहीं रह जाता है।
इसके साथ एक छिपी हुई क़ीमत भी है: बच्चों की पढ़ाई में बाधा, बुज़ुर्गों की देखभाल का बोझ महिलाओं पर, और महामारी या मंदी के समय अचानक लौटने वाले लाखों लोगों के लिए कोई तैयारी न होना।
बिहार में क्या वाक़ई काम दे सकता है
बिहार के पास वह चीज़ मौजूद है जिसकी नक़ल कोई और राज्य नहीं कर सकता: उपजाऊ ज़मीन, पानी, और घना श्रम-बल। कमी उत्पादन में नहीं, प्रसंस्करण और बाज़ार तक पहुँच में है। मखाना, मक्का, लीची, केला, सब्ज़ी और दूध — इन सबका बड़ा हिस्सा कच्चे रूप में राज्य से बाहर जाता है और मूल्य-वर्धन कहीं और होता है।
- प्रखंड स्तर पर कोल्ड चेन और छोटी प्रसंस्करण इकाइयाँ, जिनका स्वामित्व किसान समूहों के पास हो।
- सूक्ष्म उद्यमों के लिए कार्यशील पूँजी ऋण, 30 दिन में एकल-खिड़की मंज़ूरी के साथ।
- सरकारी खरीद में स्थानीय इकाइयों को प्राथमिकता — स्कूल भोजन, अस्पताल आपूर्ति और निर्माण सामग्री से शुरू।
- प्रवासी मज़दूरों का पंजीकरण, दुर्घटना बीमा और लौटने पर कौशल-मान्यता।
पलायन मजबूरी न रहे, विकल्प बने
हमारा लक्ष्य यह नहीं कि कोई बिहार छोड़कर न जाए। लक्ष्य यह है कि जाना एक विकल्प हो, मजबूरी नहीं — और लौटना संभव हो। इसके लिए हम हर ज़िले में यह गिनना शुरू कर रहे हैं कि कौन-सी योजना ने वास्तव में कितने स्थायी काम बनाए, न कि कितने उद्घाटन हुए।
स्रोत
अंतिम अद्यतन: 2026-08-20
- Census of India — migration tables
- Periodic Labour Force Survey (PLFS), MoSPI
- NITI Aayog — Multidimensional Poverty Index
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